गंगा ने धीमी आवाज़ में कहा
“बिटिया, मां का जीवन एक दीपक की तरह है। वह खुद जलकर अंधेरे को मिटाती है। अब मेरे दीपक की लौ धीमी हो गई है, लेकिन यह जानकर मैं संतुष्ट हूँ कि मेरी रौशनी ने तुम्हारे और तुम्हारे भाई के रास्ते को उजाला दिया।”
पायल ने रोते हुए मां को गले लगा लिया। उसी रात नींद में गंगा ने अंतिम सांस ली। चेहरे पर वही संतोष भरी मुस्कान थी—मानो कह रही हो कि उसके त्याग का फल उसे मिल गया।