वो कोमल है, पर कमजोर नहीं,
आँसुओं में भी एक आग है कहीं।
सहनशीलता उनका श्रृंगार है,
पर अन्याय के विरुद्ध उनका प्रहार है।
वो धरती है सबको धारण करती है,
वो गगन है सपनों को विस्तार देती है।
उनके बिना सृष्टि अधूरी है,
उनके स्पर्श से ही दुनिया पूरी है।
वो माँ बनकर त्याग सिखाती है,
बहन बनकर राह दिखाती है।
पत्नी बनकर अटल सहारा है,
और बेटी बनकर प्यारा उजियारा है।
उनके आँचल में ब्रह्मांड छिपा है,
उनकी हँसी में जीवन खिला है।
वो मौन है तो ध्यान बन जाती है,
वो गर्जे तो तूफ़ान बन जाती है।
नारी सिर्फ़ रूप नहीं, एक विचार है,
संघर्षों से जन्मा यह अपार संहार है।
जो उसे कम आँके, वो भूल कर जाए,
क्योंकि नारी ही शक्ति है, सृष्टि कहलाए।
Anu✍🏻