ज्ञान का दीप जलाते हैं शिक्षक,
अंधकार मिटा उजियारा लाते हैं शिक्षक।
बिन गुरु के जीवन अधूरा है,
सही राह दिखाना ही उनका नूरा है।
माँ-बाप देते हैं जीवन का उपहार,
पर शिक्षक सिखाते हैं जीने का सार।
संस्कारों की मूरत बन जाते हैं,
हर दिल में सम्मान पा जाते हैं।
कभी दोस्त, कभी मार्गदर्शक बनते हैं,
संशयों को सरलता से हरते हैं।
पुस्तकों की दुनिया से परिचय कराते,
ज्ञान का सागर हमें पिलाते।
गिरने पर थामने वाले हाथ हैं,
सपनों को सच करने की बात हैं।
जोश जगाते, हिम्मत दिलाते,
हर मुश्किल में साहस सिखाते।
उनके बिना शिक्षा अधूरी सी,
जीवन की नाव अधर में डूबती सी।
हर सफलता के पीछे उनकी मेहनत होती,
उनकी प्रेरणा से मंज़िल संवरती।
कभी डाँट में भी छुपा प्यार मिलता,
कभी मुस्कान से हौसला मिलता।
शिक्षक का दर्जा भगवान-सा माना,
क्योंकि उन्हीं ने इंसान को इंसान बनाया।
हर शब्द उनका आशीर्वाद बन जाता,
जीवन का हर अंधेरा मिट जाता।
सम्मान से सिर झुका करना प्रणाम,
क्योंकि शिक्षक हैं ज्ञान का धाम।
श्वेता अग्रवाल ✍️🖤