मैं तो आत्महत्या करूँगी।"
इतना कहकर वह खूबसूरत सी लड़की फुर्ती से सीढियां चढ़ती हुई औझल हो गई। वह कॉलेज की छत पर गई। उसने मुँडेर पर अपनी किताब रखीं और दोनों हथेलियों के सहारे मुँडेर पर चढ़ गई। उसने अपना मुँह फेरा ही था कि पीछे से किसी ने उसे पुकारा....
अरे! अरे ! ज़रा ठहरिए !
लड़कीं ने पलटकर देखा....
एक हैंडसम सा हट्टा-कट्टा नीली आँखों वाला गबरू जवान खड़ा था। वह हाँफ रहा था। उसने हाथ से रुकने का ईशारा किया फिर अपनी दोनों हथेलियों को घुटनों पर रखकर कुछ देर उसी मुद्रा में झुका रहा , फिर अगलें ही सेंकड में फुर्ती से तनकर खड़ा हो गया। अपने क़दमो को हौले-हौले उस लड़की की ओर बढ़ाते हुए लड़के ने बहुत ही प्यार से कहा - " आप पहले नीचे उतर जाइये !"
लड़कीं ने अचंभित होकर उस लड़के को घूरकर देखा। वह चूप्पी साधे हुए जस की तस खड़ी रहीं।
लड़का किसी कवि की तरह एक सांस में बोलता जा रहा था। चाहें कोई सुनें न सुने पर अपनी बात कहनी है...
"सुनों ! ज़िंदगी बहुत क़ीमती होतीं हैं। कोई भी क़िस्सा इतना महत्वपूर्ण नहीं होता जिसकी वजह से हम अपनी जीवनलीला ही समाप्त कर लें। माता-पिता ने टोका या प्यार में मिला धोखा यह सब तो बहुत ही मामूली सी बातें हैं।"
लड़कीं आश्चर्यचकित होकर उस लड़के की किसी फिलॉस्फर सी बातों को सुनकर कहती है...
"फिलॉसफी के स्टूडेंट हो..?"
लड़के ने सिर खुजाते हुए कहा - "नहीं"
लड़कीं ने आंखे बड़ी की और गुस्सा करते हुए बोली - " तो मुफ्त में यह सब ज्ञान क्यों दे रहें हो..?"
लड़के ने अपना हाथ लड़कीं की तरफ़ आगें बढ़ाते हुए फिल्मी डॉयलाग बोलते हुए कहा - "हम एक बार जिते है और एक बार ही मरते है। यह ज़िंदगी न मिलेंगी दोबारा।"
एक अनजान लड़का एक सेकंड में ही उस लड़की पर इतना अधिकार जता रहा था , यह देखकर वह लड़कीं ठगी हुई सी कुछ देर तक उस अजनबी लड़के को अपलक निहारतीं रहीं। उसकी नीली आँखों में उसे मासूमियत , ईमानदारी , बेशर्मी , बेबाक़ी सभी एकसाथ नज़र आ रही थीं।
लड़कीं ने डपटते हुए कहा - " जाओ यहाँ से..! फॉर गॉड सेक मेरा पीछा छोड़ दो..!"
लड़का भी बड़ा ढीठ था। ढिठाई से बोला - "आपकों अपने साथ लिए बिना यहाँ से जाने वाला नहीं हूँ। लाइए ! मुझें अपना हाथ दीजिए।"
" बड़े बदतमीज है आप !" - लड़कीं ने मुँह सिकोड़कर कहा।
उसने लड़कीं की बात को अनसुना करते हुए अपना हाथ दोबारा उस लड़की की तरफ़ बढ़ाया और अदब से कहा - "प्लीज ! आप पहले नीचे उतर जाईये।"
लड़कीं बुदबुदाई - " ढीठ कही का !"
लड़के ने समझाते हुए कहा - " आत्महत्या किसी भी समस्या का हल नहीं होता है। आप तो काफ़ी इंटेलिजेंट लग रही हैं। बहुत कम ऐसा होता है जब खूबसूरती और काबिलियत एक साथ देखने को मिलती है। आपके अंदर यह दोनों ही देकर ईश्वर ने आपको बुद्धि के साथ खूबसूरती से नवाज़ा है। आप क्यों उनके वरदान का तिरस्कार करकें आत्महत्या करने जा रही है।"
"आत्महत्या.....?"
यह सुनकर बुरी तरह से चोंक गई थीं वह लड़कीं।
वह बोली - " ओ मिस्टर ! ये क्या अनापशनाप कहते चलें जा रहें हैं , आप !"
लड़के ने हैरानी और शर्मिंदगी से अचकचाकर कहा - " बात दरअसल यह है कि मैंने आपकों यह कहते हुए सुना था कि मैं आत्महत्या करूँगी। उसके बाद फिर आप यहाँ चली आई। वैसे , आप यह बताने की ज़हमत उठाएगी कि आप यहाँ ऊपर चढ़कर क्या कर रही हैं ? कही कॉलेज को मौसम की खबरें तो नहीं दिया करती हैं।"
लड़कीं ने अपने आप को मुँडेर पर चढ़ा हुआ देखा , फिर अपनी सहेली से हुई बातचीत को मन में रिवर्स किया।
अपनी कही हुई बात याद आते ही वह लड़कीं खिलखिलाकर हँसते हुए बोली - " मैं समाजशास्त्र में मास्टर कर रहीं हूँ। आत्महत्या और भ्रष्टाचार दो टॉपिक है। मेरी सहेली ने कहा था कि वह भ्रष्टाचार वाला टॉपिक कम्पलीट करूँगी। उसकी इस बात का जवाब देते हुए मैंने कहा था कि मैं तो आत्महत्या करूँगी। आपने हमारी बातचीत पूरी सुनी होती तो आपको इस तरह की गलतफहमी नहीं होती।"
"अच्छा ! ठीक है , आपकी यह बात मान लेता हूँ। लेक़िन मुझें अब भी यह समझ नहीं आ रहा है कि आप यहाँ चढ़कर क्या करने वाली थीं..?"
लड़कीं का चेहरा मारे शर्म के हल्का सा ग़ुलाबी हो गया। वह नजरें चुराते हुए इधर-उधर देखते हुए बोली - " आज सोमवार है। मेरी मम्मी शिवजी का पूजन करती है। सावन के महीने में तो बिल्वपत्र आसानी से मिल जाते हैं बाक़ी के महीनों में बड़ी मुश्किल से मिलते हैं। कॉलेज में लगा यह बिल्वपत्र का पेड़ इस समस्या का हल कर देता है। यहाँ चढ़कर मैं बिल्वपत्र ही तोड़ने आई थी।"
"ओह! इत्तेफाक कुछ ऐसे हुए की मुझें गलतफहमी होना लाज़िमी था। आई ऐम सो सॉरी !"
शेष अगलें भाग में...
मैं प्रेम कहानी बहुत कम लिखतीं हूँ। वजह साफ़ है कि मुझें कभी किसी से इश्क वाला प्रेम नहीं हुआ! एक लेखक तो कल्पना के घोड़ो पर सवार होकर दूर निकल जाता हैं। कल्पना में ही रहता है ,कल्पना को ही जिता है।
कोई भी कमी लगती है तो बेझिझक मेरा मार्गदर्शन कीजिएगा। कहानी पसन्द आती है ,तो समीक्षा के माध्यम से अपना प्रेम प्रदर्शित कर दीजिएगा।