मन का निर्मल आकाश
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मन का निर्मल आकाश
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
प्रकृति की शांति और मन के गहरे सुकून को दर्शाती यह कविता भीतर के निर्मल आकाश की यात्रा कराती है। हर पंक्ति आत्मा को ठहर कर सुनने और नए उजाले को अपनाने का आमंत्रण देती है।
लेखक : विजय सांगा
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