तेरी नाराजगी (स्वैच्छिक)
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तेरी नाराजगी (स्वैच्छिक)
दैनिक प्रतियोगिता
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प्यार में नाराज़गी भी एक गहरी खामोशी होती है, जहां लफ़्ज़ गुम हो जाते हैं और निगाहें सब कह जाती हैं। यह कविता 'नायिका' की रूह से निकला इक इक़रार है, जो उसके रूठे हुए प्रेमी से दिल की बात कह जाती है✍️
लेखक : Sukoon Bazzad ✍️
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