नदी की पुकार
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नदी की पुकार
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
स्त्री और नदी, दोनों ही एक जैसी होती है। एक सूख जाए तो खेत बंजर हो जाते हैं, दूसरी थक जाए तो परिवार बिखर जाता है।
लेखक : तृप्ति सिंह
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