शांत मन
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शांत मन
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
जहाँ शोर थम जाए और विचार ठहर जाएँ, वहीं शांत मन की मधुर धुन सुनाई दें। न क्रोध, न लोभ, न कोई भ्रम, बस आत्मा से मिलन है शांत मन।
लेखक : Shekhar Abhash
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