यह कविता बताती है कि गौतम बुद्ध और प्रकृति हमें शांत मन का मार्ग दिखाते हैं। बुद्ध का उपदेश, वृक्षों की छाँव, झरनों की ध्वनि और पक्षियों का संगीत — ये सब मिलकर मन को शांति और सुकून प्रदान करते हैं। जब इच्छाएँ और विकार शांत हो जाते हैं, तभी जीवन सच्चा और सुंदर बनता है। शांत मन ही असली धन है, जो हमें करुणा, सत्य और अमृत समान आनंद देता है।