एकांत
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एकांत
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
एकांत कोई तन्हाई नहीं, ये आत्मा की पुकार है। जहाँ मिलती है इंसान को, खुद से मिलने की फुहार है।
: Writer Dev
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