ये दूरियां
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ये दूरियां
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
ये दूरियां दिलों को जुदा नहीं करतीं, बल्कि मोहब्बत की गहराई को और गहरा कर जाती हैं। हर फासला एक नया अहसास बनकर यादों में खिल उठता है।
: विजय सांगा
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