खामोशियाँ - Jîज्ञासा

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खामोशियाँ - Jîज्ञासा


बहुत से लोग हमारे शब्दों को समझ सकते हैं, पर केवल कुछ ही लोग होते हैं जो हमारी ख़ामोशी को पढ़ पाते हैं। क्या होगा जब एक अजनबी अचानक रूद्र की ज़िंदगी में कदम रखेगा और उसे उसी से दोबारा मिलाएगा? क्या रूद्र फिर से खुद को पा सकेगा—उस इंसान को, जो वह तब था जब ख़ामोशी ने उसकी ज़िंदगी पर क़ब्ज़ा नहीं किया था? जानने के लिए पढ़िए 'खामोशियाँ'

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