यह कहानी उस प्रेम की है जो किसी दबाव, समाज की मर्यादा या किसी मजबूरी से नहीं, बल्कि पूरी तरह दिल की स्वेच्छा से जन्म लेता है। इसमें दो दिलों की धड़कनों का मिलन है, जहाँ न कोई बंधन है न कोई शर्त। यह सिर्फ अपनेपन, भरोसे और सच्चाई पर आधारित एक ऐसा रिश्ता है जिसे दोनों ने अपनी मर्जी से चुना है।
“स्वैच्छिक प्रेम” दिखाता है कि जब इंसान अपने दिल की आवाज़ सुनता है और बिना झिझक अपना रास्ता चुनता है, तभी जीवन का असली सुख और रोमांस खिलकर सामने आता है।