यह कहानी एक पुराने रेडियो और दादाजी की यादों के इर्द गिर्द घूमती है। रेडियो के जरिए सुनाए गए किस्से पोते राज की सोच और जीवन को दिशा देते हैं। दादाजी के जाने के बाद भी वही रेडियो उसकी प्रेरणा बनकर साथ रहता है। यह कथा यादों और रिश्तों की अमर ताक़त को दर्शाती है।