सब्र
Added Successfully to library!
सब्र
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
............................................... .......होने लगी है मुझे नफरत अब सब्र से, बैचेन हो जाती हूं मैं, जब कोई सब्र का नाम ले, अब तुरंत और जल्दी मुझे चाहिए अब वो हर चीज जो मुझसे हैं जुड़ी।....
लेखक : Jyoti kumari
Add To Library
13
Views
5
Ratings
2 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप