सब्र
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सब्र
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
तूफ़ान ने चाहे लूटा हो आशियाना सारा, पर हौंसला है मिट्टी का, वो ना होगा हारा। अंधेरों से निकलकर नई सुबह जरूर बनाएगा, पंजाब फिर से खिलेगा, सब्र ही है उसका सहारा....✍️
: Sukoon Bazzad ✍️
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