सब्र
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सब्र
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
सब्र वो चुप्पी है, जिसमें सबसे ऊँची दुआ छिपी होती है, ये गिरते इंसान को भी फिर से जीना सिखा देती है।
: विजय सांगा
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