अंतर्मन मौन है !!
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अंतर्मन मौन है !!
कविता
मौन ही है चंद्रमा, धरा भी मौन है; ज्ञान भी मौन में,श्रम की साधना भी मौन है; मुखर है सफलता का वो नाद ; परंतु सुख की अनुभूति भी मौन है!!
लेखक : Nayii Kalam
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