“गुम हुआ बचपन” एक मार्मिक कहानी है, जो उस बच्चे की दास्तान बयाँ करती है जिसका बचपन हालात और गरीबी की भेंट चढ़ गया। यह कहानी सिर्फ अरुण की नहीं, बल्कि उन अनगिनत मासूम आत्माओं की आवाज़ है जिनका बचपन समय से पहले छिन जाता है। इसमें संघर्ष, दर्द और उम्मीद—तीनों का मेल है, जो पाठक के दिल को गहराई तक छू जाता है।