काली परछाई

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काली परछाई


माधव का गांव  मुंबई से 6 घंटे दूर रणकपुर में था , गांव से दूर पढ़ाई करने के बाद मुंबई में जॉब , रिया और माधव की दोस्ती भी उनके ऑफिस में ही हुई थी फिर प्यार , दोनो ने  गुपचुप शादी कर ली बिना अपने घरवालों के बताए , रिया के माता पिता को कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन माधव के घरवाले अभी भी पुराने ख्यालात के थे , गांव में बड़ी सी हवेली जिसका वारिश माधव था , उसकी सगाई बचपन में ही तय हो गई थी गांव के ही सरपंच की बेटी मोहिनी जैसा नाम वैसा मोहक चेहरा , नयन - नक्ष किसी मोहिनी से कम नहीं था ,  दोनों बड़े हुए ,लेकिन  माधव का मन गांव में नहीं लगता था , वो पढ़ाई करने शहर चला गया , उसके जाने की खबर सुनकर मोहिनी उससे मिलने आई थी , वो माधव को मन ही मन में पति स्वीकार कर चुकी थी , और उससे प्यार भी बहुत करती थीं , जिस दिन माधव बस से गांव से रवाना हुआ उस दिन वो माधव से मिलने आई और उसने उसे जाने से पहले रोकते हुए कहा , " माधव तुम शहर जा रहे हो मै तुम्हे नहीं रोकूंगी लेकिन मैं तुम्हारा तब तक इंतजार करूंगी जब तक तुम वापस नहीं आते , तुम्हारी मोहिनी सिर्फ तुम्हारी दुल्हन बनेगी , वादा करो कि मेरे अलावा किसी के बारे में कभी सोचोगे नहीं ।" " कसम से मोहिनी मै किसी और की तरफ देखने की तो दूर की बात है मै सोचूंगा भी नहीं और जैसे ही शहर में जॉब लगेगी मै तुम्हे दुल्हन बनाकर शहर ले जाऊंगा फिर हम और तुम और हमारा प्यार ।"

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