चलो एक साथ बिछड़ते है ,
दिल के बंधनो को अब तोड़ते है ,
छोड़ो अब क्यो बेफ़िज़ूल झगड़ते है ,
खामोशी से रिश्तो को अलविदा कहते है ।
लगा कर दिलो पर अपने ताले ,
सपनो की दुनिया को छुपाए रखते है ,
मोहब्बत के आशियानो से निकलकर ,
हर कदम पर यादो का बोझ ढोते है।
जैसे ऊपर से होता है नाज़ुक गुलाब ,
खुशबू मे बसता है प्यार का ख्वाब ,
नीचे गुलाब के भी कांटे लगते है ,
दिल को चुभ जाए अगर बात ,
आंसु आग बनकर आंखों में सुलगते है !
सहना पड़ता है जिंदगी में किल्लत का भी दौर ,
तानो से नहीं बातो मे मिठास भरते है ,
हर खुशी और दर्द का मौसम ,
चलो प्यार से हाथों में हाथ डाल पार करते है !
मोहब्बत मे सितारे निकलते है ,
रातो को रोशन ख्वाब करते है ,
मैं तुम पर दोष डालूँ तुम जमाने पर ,
क्यों हम हालातो से डरते है ?
उलझकर अनकहे इम्तिहान पर ,
हर बार क्यों बेफिजूल मे झगड़ते है ,
दिल के ज़ख्मों को खुद में छिपाकर,
चलो बिछड़कर खुद को प्यार के दर्द से मुक्त करते है !