भूतिया रात
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भूतिया रात
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
खिड़की से झाँके एक धुंधली सूरत, आँखों में चमके अजीब सी ज्वाला। हवा बहा दे ठंडी सिहरन, छू जाए जैसे कोई परछाईं गुमन।
लेखक : rani
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