आतंकवाद (स्वैच्छिक)
Added Successfully to library!
आतंकवाद (स्वैच्छिक)
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
धर्म का नाम लेकर खेला खेल, नफरत की दीवारें ऊँची और ढेर। मानवता को बाँट रहे टुकड़ों में, शांति को डुबो दिया आँसुओं के सागरों में।
: Writer Dev
Add To Library
19
Views
5
Ratings
1
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप