गाँव में जब दसवीं का रिजल्ट आया तो गौरी ने टॉप किया। लेकिन खुशी के बीच एक नई चिंता खड़ी हो गई – अब उसे आगे की पढ़ाई के लिए शहर जाना होगा। कस्बे में सिर्फ़ बारहवीं तक की पढ़ाई थी।
पिता ने माथा पकड़ा – “गौरी, बेटी… शहर में पढ़ाई-लिखाई बहुत महँगी है। हमारे पास इतनी जमीन भी नहीं है कि फसल बेचकर खर्च निकाल सकें।”