रिश्तों की चुभन
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रिश्तों की चुभन
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कुछ रिश्ते कभी फूल से लगते हैं, तो कभी शूल से चुभते हैं। हँसी के वो बीते पल रुला देते हैं, और खामोशी से हजारो सवाल उठा जाते हैं। उम्मीदों का बोझ बहुत भारी होता है, जो ना हो पूरा तो अपनों को अपनों से दूर करता है।
लेखक : निर्मेश
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