रिश्तों की चुभन
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रिश्तों की चुभन
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
रिश्ते, कभी फूल जैसे महकते हैं, तो कभी कांटों-सी चुभन बन जाते हैं।
लेखक : तृप्ति सिंह
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