रिश्तों की चुभन
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रिश्तों की चुभन
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
हँसते चेहरों के पीछे दर्द की है धुन, हर मुस्कान के भीतर छुपी है चुभन। जो रिश्ते कभी थे सहारा ज़िंदगी का, आज वही बोझ हैं थके दिल की बंदगी का।
: rani
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