रिश्तो की चुभन
Added Successfully to library!
रिश्तो की चुभन
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
साथ चलते-चलते काँटे भी बो दिए गए, अपनों के ही लफ़्ज़ ज़हर जैसे हो गए। ममता की जगह आई तानों की चोट, सपनों की जगह बस रह गया खामोशी का बोझ।
: Writer Dev
Add To Library
22
Views
5
Ratings
1 Min
Duration
लाइब्रेरी
श्रेणी
लिखे
अपडेट
शॉप