“अपराध की छाया” एक ऐसे युवक की कहानी है जो हालात और महत्वाकांक्षा के चलते अपराध की अंधेरी दुनिया में कदम रखता है। छोटी-मोटी चोरी से शुरू होकर उसका सफ़र बड़े अपराधों तक पहुँचता है, लेकिन अंत में लालच, धोखे और पुलिस की पकड़ से वह बच नहीं पाता। यह कहानी दिखाती है कि अपराध चाहे मजबूरी में शुरू किया जाए या महत्वाकांक्षा में, उसका अंजाम हमेशा विनाशकारी ही होता है।