सनाटा कुछ कहता है
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सनाटा कुछ कहता है
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कभी लगता जैसे वो साथी है, कभी लगता बोझिल सा परछाईं, पर सन्नाटे की इस खामोशी में, छिपी होती है दुनिया की सच्चाई।
लेखक : rani
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