वो चिट्ठी जो भेजी न गई
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वो चिट्ठी जो भेजी न गई
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कभी हँसी की लकीरें खींची थीं उसमें, कभी आंसुओं की बूँदें गिर पड़ीं। कभी अरमानों ने सजाया था उसे, कभी शिकायतों ने भी जगह गढ़ी।
: rani
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