महंगाई
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महंगाई
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
सरकार कहे – सब ठीक चल रहा, जनता कहे – जीना मुश्किल हो रहा। महँगाई ने ऐसा जाल बिछाया, हर कोई इसमें उलझ पाया।
लेखक : rani
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