महंगाई
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महंगाई
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
सब्ज़ी, दाल, अनाज सारा, तेल हुआ अब सोने सा प्यारा। बच्चे पूछें – "माँ, मिठाई?" पर जेब कहे – "बस यही कमाई!"
लेखक : Writer Dev
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