यह कविता बढ़ती हुई महंगाई के कारण गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों की परेशानियों को दर्शाती है। कविता में बताया गया है कि कैसे महंगाई के कारण रोटी-दाल जैसी बुनियादी ज़रूरतें भी पूरी करना मुश्किल हो गया है। अमीर लोग तो आराम से जी रहे हैं, लेकिन गरीब लोगों की कमर टूट रही है और वे चिंता में हैं।