बचपन वाली टॉफी
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बचपन वाली टॉफी
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
लाल, पीली, हरी सी बोरी, उसमें छिपी थी खुशियों की डोरी। दो पैसे में मिलती थी ख़ुशी, मीठी-मीठी बचपन की वही टॉफ़ी।
लेखक : rani
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