वक्त के पीछे हम
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वक्त के पीछे हम
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
वक्त कितनी तेजी से भाग रहा है , और वक्त के पीछे - पीछे हम , कभी खुश रहने की वजह ना थी , फिर भी हमेशा होठों पर मुस्कान आती थी , अब ढेरों वजह है लेकिन वो खुशियां नहीं मिलती , वो घर जहां सुकून मिला करता था , वहीं घर पराया सा महसूस होने लगा है ,
: Mahima
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