पहला ख़त
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पहला ख़त
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
कभी-कभी शब्द सिर्फ़ काग़ज़ पर नहीं लिखे जाते, बल्कि, वे दिल के सबसे गहरे कोनों से निकलकर स्याही में बदल जाते हैं ✍️
लेखक : Sukoon Bazzad ✍️
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