थोड़ी देर और जी लूं
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थोड़ी देर और जी लूं
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
"थोड़ी देर और जी लूं" एक भावनात्मक कविता है जो अधूरे सपनों, अधूरी बातों और रुके हुए एहसासों को थोड़ा और जी लेने की ख्वाहिश बयां करती है। यह बताती है कि कभी-कभी ठहर जाना ही ज़िंदगी को सच में महसूस करने का सबसे सुंदर तरीका होता है।
: विजय सांगा
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