थोड़ी देर और जी लू
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थोड़ी देर और जी लू
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
"एक आत्मचिंतन से भरी कविता, जो अधूरी ख्वाहिशों, टूटी यादों और जीने की अंतिम उम्मीद को भावुकता से दर्शाती है।"
लेखक : साइलेंट लफ्जो का सफर
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