चेहरों के पीछे की दुनिया
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चेहरों के पीछे की दुनिया
कविता
कविता
चेहरों के पीछे की दुनिया को कौन कोई समझ पाया जिसको जो पसंद वह दुनिया में मुखोटा ओढ़ के आया काश वह समझ पाता बिना मुखोटे के भी काम चल सकता जैसा वह दिखाना चाहे काश वैसा वह सचमुच हो पाता….
: malwin
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