**🖋️ *भावनाओं में डूबी एक तन्हा कविता...***
जब जीवन की भीड़ में अकेलापन चुपके से आकर बैठ जाता है,
जब यादों की परछाइयाँ दिल की दीवारों पर दस्तक देती हैं...
तब कुछ लम्हें शब्द बन जाते हैं —
खुशियों को बाँटकर, ग़मों को पीकर,
एक ख़ास रिश्ते की याद में दिल से निकले ये अल्फ़ाज़...
यह कविता उस रिश्ते के लिए है जो कभी बहुत क़रीब था,
जिसकी मौजूदगी सुकून देती थी,
और अब उसकी कमी हर लम्हे को तन्हा कर देती है।