वक्त की साजिशें
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वक्त की साजिशें
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
वक़्त की साजिशों को बयां करती ये कविता, खोए लम्हों और बदलते रिश्तों की खामोश कहानी है। हर पंक्ति एक एहसास है, जो गुज़र गया, पर दिल में हमेशा रह गया।
: विजय सांगा
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