गुस्ताख दिल
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गुस्ताख दिल
कविता
कविता
आज ये दिल फिर से गुस्ताखियां कर बैठा , जो कभी दूर हो चुका था सालों पहले , आज फिर से उसे देखकर दिल हार बैठा , मन में झिझक थी , होठों पर दबी सी मुस्कान , आज ये दिल फिर से मनमानी कर बैठा
लेखक : Mahima
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