सरहद की सांझ

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सरहद की सांझ


यह कविता एक शहीद सिपाही की अंतिम संध्या को शब्दों में पिरोती है, जहाँ कर्तव्य, त्याग और अमरता एक साथ साँझ की चुप्पी में समा जाते हैं।

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