सरहद की सांझ
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सरहद की सांझ
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
यह कविता एक शहीद सिपाही की अंतिम संध्या को शब्दों में पिरोती है, जहाँ कर्तव्य, त्याग और अमरता एक साथ साँझ की चुप्पी में समा जाते हैं।
: विजय सांगा
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