आरव ने सिर्फ एक ही लेटर लिखा। लेकिन उस एक लेटर में उसने अपनी पूरी ज़िंदगी उतार दी। ये कोई आम चिठ्ठी नहीं, बल्कि 63 हिस्सों में बंटी एक अधूरी मोहब्बत की दास्तान है। जिसमें हर याद, हर बात, हर दर्द बस सिया के लिए है।
कभी कॉलेज की हल्की सी मुस्कान से शुरू हुई ये कहानी,
धीरे धीरे आरव की दुनिया बन जाती है। उसकी हर खुशी, हर उदासी, हर ख़ामोशी सिर्फ सिया से जुड़ जाती है। बिना इज़हार, बिना शर्तों के।
इस कहानी की सबसे खास बात ये है कि ये पूरी कहानी सिया को लिखा गया एक ही आख़िरी ख़त है। जो उसे तब मिलता है, जब आरव को ढूंढते ढूंढते बहुत देर हो चुकी होती है। कभी वो मुस्कुराती है पढ़ते हुए, कभी आँखें भर आती हैं। पर हर लाइन के साथ, वो आरव को और महसूस करने लगती है।
हर भाग में एक याद है। हर याद में छुपा है एक एहसास। और इन एहसासों की तह तक पहुंचते पहुंचते, सिया को एहसास होता है कि सच्चा प्यार कभी मरता नहीं। वो बस खामोश हो जाता है। किसी डायरी में, किसी चिठ्ठी में, या किसी अधूरी कहानी में।
कुछ अल्फ़ाज़ मैंने रख दिए हैं पन्नों पे,
शायद तू पढ़े कभी,
वरना दिल ने तो तुझे हर रोज़ आवाज़ दी है,
चुपचाप, बिना किसी उम्मीद के।
✍️✍️ आपका अपना दोस्त Slient लफ्जो का सफर 🥰🥰