पिता का मौन प्रेम
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पिता का मौन प्रेम
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
पिता का मौन प्रेम! पिता का प्रेम बोलता नहीं, बस हर कठिन राह पर हमारे साथ चलता है। उनकी खामोशी में भी दुआओं की आवाज़ होती है।
: तृप्ति सिंह
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