तीन सालों की चाहत, अनगिनत सपने, और दिल में छुपा एक ऐसा राज़, जो हर पल टूटने का डर लिए हुए था। अग्नि — एक लड़की जो दिल्ली की भीड़-भाड़ में अपनी पहचान बनाना चाहती थी, लेकिन उसका अतीत उसे हर कदम पर पकड़ता रहा। उसने वीर प्रताप सिंह से तीन सालों तक मोहब्बत की, उस पर भरोसा किया, और खुद को उसके हवाले कर दिया।
लेकिन एक दिन, उस भरोसे के टूटने की आवाज़ ने उसकी दुनिया को चीर दिया। वह बार की उस भीड़ में खड़ी थी, जब उसने देखा कि वीर उसकी सच्चाई से भी बड़ी किसी और के साथ है।
अब अग्नि के सामने है दो रास्ते — या तो टूट जाना या खुद को जलाकर राख से फिर से उठना। यह कहानी है उस जज्बे की, उस दर्द की, और उस इम्तिहान की जो इश्क़ और आत्मसम्मान की हदें तोड़ देता है।
क्या अग्नि अपनी सच्चाई को सहन कर पाएगी? क्या वह उस धोखे से ऊपर उठ पाएगी? या फिर वह भी उन टूटे हुए ख्वाबों की तरह धुंध में खो जाएगी?
जानने के लिए पढ़िए "इम्तिहान-ए-इश्क़"