तितली की उड़ान

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तितली की उड़ान


उड़ती थी... पर अपने मन से नहीं। हर दिशा, हर उड़ान – किसी और की तय की हुई।उसकी आज़ादी, उसकी उड़ान... एक प्रोग्राम थी, एक आदेश... एक भ्रम! एक कविता जो उड़ान की परिभाषा बदल देगी। पढ़िए अब... और अपने भीतर की तितली को जगाइए।
: Slient girl

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