कान्हा का बालरूप

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कान्हा का बालरूप


यह कविता भगवान कृष्ण के मनमोहक रूप का विस्तृत वर्णन करती है, जिसमें उनके नीले रंग की आभा, कमल जैसे नयन, घुँघराले केश, होठों की मुस्कान, कुंडल, पीताम्बर, कमरबंद और चरणों में बजने वाले घुँघरुओं का ज़िक्र है। यह सब मिलकर उनकी दिव्य और अनुपम छवि को साकार करते हैं।

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