एक मौका
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एक मौका
दैनिक प्रतियोगिता
कविता
माना कि नादानी हुई मुझसे , गलतियां जान बुझ कर नहीं की मैने , फिर से भरोसा जीतने का एक मौका तो मिल जाता , जीते जी हम जिसके न हुए , उनसे मिलने का एक मौका तो मिल जाता ,
लेखक : Mahima
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